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अपने नन्हे-मुन्ने बच्चों को जरूर दें इन 3 वैक्सीन की 'महाडोज', बीमारियां रहेंगी कोसों दूर

समय पर बच्चों का वैक्सीनेशन करवाकर आप उन्हें कई गंभीर और जानलेवा बीमारियों से बचा सकते हैं। नवजात के जन्म के साथ ही पेरेंट्स को वैक्सीनेशन कार्ड दिया जाता है। लेकिन इसके अलावा भी कुछ ऐसे वैक्सीन होते हैं, जिन्हें लगवाना मासूमों को 'डबल सुरक्षा' देता है। हाल ही में डॉ. पार्थ सोनी ने ऐसे ही तीन महत्वपूर्ण वैक्सीन के बारे में बताया है। कौनसे हैं ये वैक्सीन और क्यों हैं ये बच्चों के लिए जरूरी, जानते हैं।

1. टाइफाइड वैक्‍सीन

डोज : बच्चों को इस वैक्सीन की एक या दो डोज लगाई जा सकती है। पहली डोज 6 माह में, वहीं इसके बाद बूस्टर डोज डॉक्टर की सलाह पर लगवा सकते हैं।

भारत में नवजातों के लिए टाइफाइड गंभीर रोग हो सकता है। बच्चों को इसकी अधिकतम दो डोज लगाई जाती है। पहली डोज छह माह की उम्र में लगाई जाती है। इस एक डोज से ही बच्चे इस रोग से बच सकते हैं। लेकिन अगर आप टाइफाइड संभावित क्षेत्र में रह रहे हैं या आपके आप-पास के क्षेत्रों में टाइफाइड रोग बहुत ज्यादा फैल रहा है तो आप बच्चे को इसकी दूसरी बूस्टर डोज भी लगवा सकते हैं। टाइफाइड मुख्य रूप से गंदे पानी या खाने के सेवन से होता है। टाइफाइड के कारण बच्चे गंभीर रूप से बीमार हो सकते हैं। इस रोग के कारण बच्चों को संक्रमण होने का डर रहता है। उन्हें तेज बुखार आना, ठंड लगना, सिरदर्द, पेट दर्द के साथ दस्त, उल्टी जैसी परेशानियां हो सकती हैं। कई बार यह पेट के अल्सर का कारण भी बन जाता है। ऐसे में मात्र एक या दो वैक्सीन लगाकर आप अपने बच्चों को इस गंभीर रोग से बचा सकते हैं।

2. हेपेटाइटिस ए वैक्सीन

डोज : एक साल के बच्चे को इसकी पहली डोज दी जाती है। इसके छह माह के बाद डेढ़ साल की उम्र में दूसरी डोज लगती है।

भारत में छोटे बच्चों में हेपेटाइटिस 'ए' रोग के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। ऐसे में इस गंभीर रोग से बच्चों को सुरक्षित रखना जरूरी है। इसके लिए आवश्यक है कि पेरेंट्स हेपेटाइटिस ए रोग की रोकथाम के लिए बच्चों को वैक्सीन लगवाएं। बचपन में इससे सुरक्षा के लिए मात्र दो डोज देना बच्चे को इस रोग से जीवन भर की सुरक्षा प्रदान करने में सक्षम है। इसकी पहली डोज एक साल के बच्चे को लगाई जाती है। पहली डोज के छह माह के बाद इसकी दूसरी डोज लगाई जाती है। हेपेटाइटिस 'ए' के कारण बच्चों में तेज बुखार, उल्टी, दस्त, आंतों में संक्रमण जैसी परेशानियां हो सकती हैं।

3. चिकन पॉक्स से बचाव जरूरी

डोज : चिकन पॉक्स से बचाव के लिए बच्चों को दो डोज दी जाती है। पहली डोज 15 माह की उम्र में दी जाती है। वहीं दूसरी डोज 18 से 19 माह की उम्र में देनी चाहिए।

चिकन पॉक्स एक गंभीर संक्रामक रोग है। यह संक्रमण वैरिसेला जोस्टर नामक वायरस से फैलता है। इस रोग में बच्चों को बुखार, त्वचा पर रेशैज, कई बार लंग्स और ब्रेन में भी संक्रमण का खतरा रहता है। इस रोग के कारण बच्चे काफी परेशान हो जाते हैं। ऐसे में बहुत जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों को इसकी डोज लगवाएं। इस गंभीर रोग से बचाव के लिए बच्चों को दो डोज दी जाती है। पहली डोज 15 माह में और दूसरी 18 से 19 माह की आयु में लगवानी चाहिए।

- My Dost

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